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Dipanshu Shams
main muhaajir hooñ ye kahtaa ja raha hai
main muhaajir hooñ ye kahtaa ja raha hai | मैं मुहाजिर हूँ ये कहता जा रहा है
- Dipanshu Shams
मैं
मुहाजिर
हूँ
ये
कहता
जा
रहा
है
शाख़
से
उड़कर
परिंदा
जा
रहा
है
इश्क़
क्या
है
कोई
पूँछे
यार
उस
सेे
खुद
ख़ुशी
करने
जो
लड़का
जा
रहा
है
आ
गई
मंज़िल
नज़र
लगता
है
उसको
जो
मुसाफ़िर
मुस्कुराता
जा
रहा
है
बूढ़े
घुटनों
को
ज़रूरत
धूप
की
है
और
सूरज
है
कि
छुपता
जा
रहा
है
मैं
यक़ीं
कैसे
करूँँ
उस
आदमी
का
जो
बनारस
कहके
शिमला
जा
रहा
है
- Dipanshu Shams
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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तुझे
मेरा
ठिकाना
ढूँढ़ना
है
तो
अँधेरा
कर
अरे
पगले
अँधेरे
में
ही
तो
जुगनू
चमकता
है
Dipanshu Shams
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जब
उसकी
याद
के
झूले
में
झूल
जाता
हूँ
तमाम
काम
की
बातें
मैं
भूल
जाता
हूँ
निग़ाह-ओ-दिल
ही
फ़क़त
लेते
हैं
मज़ा
सारा
मैं
कू-ए-यार
तो
अक्सर
फ़ुज़ूल
जाता
हूँ
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Dipanshu Shams
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सड़क
किनारे
लगा
के
दुकान
रंगों
की
तमाम
तितलियाँ
रंग
अपने
बेच
देती
हैं
Dipanshu Shams
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लगा
सके
तो
मुझे
कुछ
हसीन
रंग
लगा
यक़ीन,
इश्क़,
इबादत
ये
तीन
रंग
लगा
लगाऊँ
मैं
ही
तुझे
रंग
दोस्त
ठीक
नहीं
तू
भी
ज़रा
मेरे
हाथों
से
छीन
रंग
लगा
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Dipanshu Shams
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पार
इस
हद्दे-जुनूँ
को
अपने
हर
पल
हम
करेंगे
या
तो
पागल
हम
बनेंगे
या
तो
पागल
हम
करेंगे
Dipanshu Shams
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