क्या अजब तमाशा है हुस्न के ठिकानों पर

  - Dipanshu Shams
क्याअजबतमाशाहैहुस्नकेठिकानोंपर
इश्क़रोरहातन्हाहिज्रकेतरानोंपर
ज़ीस्तएकग़मकाहैकॉम्प्लेक्सजिस
मेंबस
अश्क़-बारआँखेंहैंदर्दकीदुकानोंपर
वोनिशानेमछलीकीआँखपरलगाताहै
औरनज़रहैमछलीकीउसकेसबनिशानोंपर
देखकरख़ुशीहोतीऔरसुनकेदुखहोता
हैंकिताबेंहाथोंमेंगालियाँज़बानोंपर
प्लेनक्रैशहोताजबदेखाइकपरिंदेने
ध्यानदेनेवोअपनीफिरलगाउड़ानोंपर
शम्सकुछक़दमचलकेथकगएजोकहतेथे
तुमकहोतोचढ़जाऍंहमखड़ीचटानोंपर
  - Dipanshu Shams
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