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Shajar Abbas
vaa'da vo saath jeene ka kar to ga.e shajar
vaa'da vo saath jeene ka kar to ga.e shajar | वा'दा वो साथ जीने का कर तो गए शजर
- Shajar Abbas
वा'दा
वो
साथ
जीने
का
कर
तो
गए
शजर
लेकिन
ये
वा'दा
उन
सेे
निभाया
ना
जाएगा
- Shajar Abbas
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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दश्त-ए-ग़ुर्बत
में
रोते
फिरते
हैं
अपनी
हम
जान
खोते
फिरते
हैं
देखिए
क़ैस
फूल
से
दिल
पे
हिज्र
का
बोझ
ढोते
फिरते
हैं
ग़म
में
हम
आपकी
जुदाई
के
अपना
दामन
भिगोते
फिरते
हैं
इश्क़
की
जो
बिखर
गई
तस्बीह
उसके
दाने
पिरोते
फिरते
हैं
हम
शजर
देखिए
अज़ीज़ो
में
मीर
से
ख़्वार
होते
फिरते
हैं
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Shajar Abbas
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सदा-ए-क़ल्ब-ए-मोमिन
है
है
ज़िक्र-ए-मुस्तफ़ा
अच्छा
है
ज़िक्र-ए-मुर्तज़ा
अच्छा
है
ज़िक्र-ए-सय्यदा
अच्छा
अली
का
ज़िक्र
करते
हैं
यूँँ
मोमिन
बर-सर-ए-महफ़िल
अली
का
ज़िक्र
लगता
है
ख़ुदा
को
बा
ख़ुदा
अच्छा
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Shajar Abbas
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इश्क़
तूने
कहाँ
किया
है
शजर
गर
लबों
पर
तिरे
ये
बैन
नहीं
बे
क़रारी
है
दर्द-ए-दिल
की
दवा
दर्द-ए-दिल
की
दवा
ये
चैन
नहीं
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Shajar Abbas
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चाँद
को
मेरे
देखने
के
लिए
चाँद
ख़ुद
आसमाँ
से
निकलेगा
Shajar Abbas
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ग़ालिब-ओ-मीर
सा
माना
मेरा
दीवान
नहीं
मुझ
सा
शायर
भी
शजर
होना
कुछ
आसान
नहीं
मान
लूँ
कैसे
मोहम्मद
का
सहाबा
उसको
या
अली
आप
पे
जिस
शख़्स
का
ईमान
नहीं
हज़रत-ए-शेख़
मुझे
लेके
चलो
कू-ए-बुताँ
क़ल्ब-ए-मुज़तर
में
मेरे
ख़ुल्द
का
अरमान
नहीं
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Shajar Abbas
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