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Shajar Abbas
shajar main gul ka bosa le raha hooñ
shajar main gul ka bosa le raha hooñ | 'शजर' मैं गुल का बोसा ले रहा हूँ
- Shajar Abbas
'शजर'
मैं
गुल
का
बोसा
ले
रहा
हूँ
धुआँ
काटोँ
के
दिल
से
उठ
रहा
है
- Shajar Abbas
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जलते
दिए
सा
इक
बोसा
रख
कर
उस
ने
चमक
बढ़ा
दी
है
मेरी
पेशानी
की
Swapnil Tiwari
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बोसा
लिया
जो
उस
लब-ए-शीरीं
का
मर
गए
दी
जान
हम
ने
चश्मा-ए-आब-ए-हयात
पर
Ameer Minai
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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दो
झुके
नयनों
ने
जो
दिनभर
किया
संवाद
लेकर
मैं
अयोध्या
लौट
आया
लखनऊ
से
याद
लेकर
तीन
झुमका
चार
बोसा
पाँच
झप्पी
आठ
कंगन
रख
दिया
है
पर्स
में
पूरा
अमीनाबाद
लेकर
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Jatin shukla
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बोसा
आँखों
का
जो
माँगा
तो
वो
हँस
कर
बोले
देख
लो
दूर
से
खाने
के
ये
बादाम
नहीं
Amanat Lakhnavi
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न
हो
बरहम
जो
बोसा
बे-इजाज़त
ले
लिया
मैं
ने
चलो
जाने
दो
बेताबी
में
ऐसा
हो
ही
जाता
है
Jalal Lakhnavi
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बोसा
होंटों
का
मिल
गया
किस
को
दिल
में
कुछ
आज
दर्द
मीठा
है
Muneer Shikohabadi
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नमकीं
गोया
कबाब
हैं
फीके
शराब
के
बोसा
है
तुझ
लबाँ
का
मज़े-दार
चटपटा
Abroo Shah Mubarak
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गुड़
सीं
मीठा
है
बोसा
तुझ
लब
का
इस
जलेबी
में
क़ंद
ओ
शक्कर
है
Faez Dehlvi
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लुटाते
हैं
वो
दौलत
हुस्न
की
बावर
नहीं
आता
हमें
तो
एक
बोसा
भी
बड़ी
मुश्किल
से
मिलता
है
Jaleel Manikpuri
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ख़ुद
को
हमारी
आँख
से
ओझल
किया
गया
इस
तरह
हमको
दोस्तों
पागल
किया
गया
अफ़सोस
है
शजर
मुझे
गुलशन
को
इश्क़
के
हिजरत
का
करके
फ़ैसला
मक़तल
किया
गया
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Shajar Abbas
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घर
से
हम
निकले
थे
वाइज़
जानिब-ए-सू-ए-हरम
जानिब-ए-कू-ए-बुताँ
को
हज़रत-ए-दिल
ले
गए
ख़ाक
ने
हमको
दिया
आकर
लिबास-ए-आख़िरत
पैरहन
जब
लूट
कर
मक़तल
में
क़ातिल
ले
गए
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Shajar Abbas
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रात
भर
एड़ियाँ
बिस्तर
पा
रगड़ता
हूँ
'शजर'
नींद
की
गोलियाँ
खाकर
मुझे
नींद
आती
है
Shajar Abbas
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दर्द-ए-महजूरी
की
आयत
ऐसे
उतरी
क़ल्ब
पर
क़ल्ब
की
टकराईं
जाकर
किर्चियाँ
दीवार
पर
Shajar Abbas
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परिंदे
कहते
हैं
सय्याद
से
रिहा
कर
दे
हमारे
बिन
ये
शजर
सूना
सूना
लगता
है
Shajar Abbas
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