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Shajar Abbas
shajar ko dekh ke hairat zada hui duniya
shajar ko dekh ke hairat zada hui duniya | शजर को देख के हैरत ज़दा हुई दुनिया
- Shajar Abbas
शजर
को
देख
के
हैरत
ज़दा
हुई
दुनिया
शजर
जो
घर
से
शजर
की
तलाश
में
निकला
- Shajar Abbas
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है
नार
दोस्तों
कसरत
से
मुंतज़िर
उनकी
ग़म-ए-हुसैन
में
जो
कारोबार
करते
हैं
ये
सब
हैं
गुलशन-ए-हैदर
के
गुल
शजर
ज़ैदी
ये
गुल
तब्बसुम-ए-लब
से
शिकार
करते
हैं
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Shajar Abbas
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
Zubair Ali Tabish
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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इसलिए
भी
इस
शजर
से
सबको
इतना
प्यार
है
दे
रहा
है
फल
अभी
ये
और
सायादार
है
ऐ
ख़ुदा
इस
ना-ख़ुदा
की
ख़ैर
हो
ये
नासमझ
ये
समझता
है
कि
इसके
हाथ
में
पतवार
है
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Vashu Pandey
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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खड़े
होकर
कहा
ये
आइने
के
रु-बा-रु
मैंने
शजर
तुमको
कहीं
मिल
जाए
मुझको
इत्तिला
करना
Shajar Abbas
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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साया
है
कम
खजूर
के
ऊँचे
दरख़्त
का
उम्मीद
बाँधिए
न
बड़े
आदमी
के
साथ
Kaif Bhopali
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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सामने
दुनिया
के
गर
मजबूर
होते
जाएँगे
रफ़्ता
रफ़्ता
देखना
हम
दूर
होते
जाएँगे
ऐ
मिरे
हमदम
यक़ीनन
आपके
जाने
के
बाद
सारे
मंज़र
शहर
के
बे-नूर
होते
जाएँगे
ठोकरे
खाती
फिरेगी
दर-ब-दर
इंसानियत
लोग
जब
दौलत
पे
सब
मग़रूर
होते
जाएँगे
मुस्कुराकर
आप
जितने
फ़ैसले
देंगे
हुज़ूर
आपके
सब
फ़ैसले
मंज़ूर
होते
जाएँगे
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Shajar Abbas
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मोहब्बत
के
हैं
पिछले
ज़ख़्म
ताज़ा
मोहब्बत
फिर
दोबारा
कर
रहे
हैं
Shajar Abbas
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तुम
कौन
हो
ये
ख़ाक
बता
पाएँ
तुम्हें
हम
हम
कौन
हैं
हम
ख़ुद
नहीं
पहचानते
ख़ुद
को
Shajar Abbas
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निगाह-ए-ख़ार
में
हम
ख़ार
बनके
चुभने
लगे
गुल-ए-चमन
पे
लिखी
जब
से
शा'इरी
हमनें
Shajar Abbas
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अजीब
हाल
है
मेरा
फ़िराक़-ए-यार
के
बाद
खुली
फ़ज़ाओ
में
घुट-घुट
के
मर
रहा
हूँ
मैं
Shajar Abbas
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