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Shajar Abbas
saal-e-maazi ne faqat zakham diye hain mujhko
saal-e-maazi ne faqat zakham diye hain mujhko | साल-ए-माज़ी ने फ़क़त ज़ख़्म दिए हैं मुझको
- Shajar Abbas
साल-ए-माज़ी
ने
फ़क़त
ज़ख़्म
दिए
हैं
मुझको
ऐ
नये
साल
तू
कुछ
साथ
में
ख़ुशियाँ
लाना
- Shajar Abbas
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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हर
हसीं
सुब्ह-ओ-शाम
भूल
गए
राह-ए-मय-ख़ाना
जाम
भूल
गए
आप
का
नाम
ख़ाक
याद
रहे
हम
'शजर'
अपना
नाम
भूल
गए
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Shajar Abbas
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मैं
जिसे
बा
वफ़ा
समझता
था
यार
वो
शख़्स
बे-वफ़ा
निकला
Shajar Abbas
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बे
तहाशा
देखा
है
बे
शुमार
देखा
है
आज
उसकी
आँखों
में
मैंने
प्यार
देखा
है
Shajar Abbas
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महज़
तुम
राज़ी
हो
जाओ
निकाह
मुझ
सेे
करने
को
तुम्हारे
बाबा
मादर
को
क़सम
से
मैं
मना
लूँगा
Shajar Abbas
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इबलीस
जैसे
सज्दे
अदा
करके
रात
दिन
चाहत
शजर
के
दिल
में
हैं
देखो
बहिश्त
की
Shajar Abbas
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