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Shajar Abbas
maqsad-e-ilm hai islaah zamaane ki shajar
maqsad-e-ilm hai islaah zamaane ki shajar | मक़सद-ए-इल्म है इस्लाह ज़माने की शजर
- Shajar Abbas
मक़सद-ए-इल्म
है
इस्लाह
ज़माने
की
शजर
मक़सद-ए-इल्म
फ़क़त
पैसा
कमाना
नहीं
है
- Shajar Abbas
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जिस
की
हर
शाख़
पे
राधाएँ
मचलती
होंगी
देखना
कृष्ण
उसी
पेड़
के
नीचे
होंगे
Bekal Utsahi
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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एक
साया
है
घने
पेड़
का
मेरे
सर
पर
एक
आँचल
से
मुझे
ठंडी
हवा
आती
है
Binte Reshma
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सवालन
उसने
पूछा
था
शजर
मैं
कैसी
लगती
हूँ
जवाबन
मैंने
ये
बोला
अति
सुन्दर
अति
सुन्दर
Shajar Abbas
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
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Shajar Abbas
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जब
तलक
तू
साथ
था
मुश्किल
नहीं
थी
ज़ीस्त
में
यार
मैं
तुझ
से
बिछड़
कर
मुश्किलों
में
घिर
गया
Shajar Abbas
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मिरा
जिस
शख़्स
पर
दिल
आ
गया
है
वो
मक़तल
में
मुक़ाबिल
आ
गया
है
Shajar Abbas
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बहुत
नाजां
था
ख़ुद
पर
चाँद
के
मुझ-सा
नहीं
कोई
उठाकर
हमने
फिर
उसको
तेरी
तस्वीर
दिखला
दी
Shajar Abbas
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दर्द-ए-दिल
जब
भी
मेरा
हद
से
सिवा
होता
है
मैं
क़लम
लेता
हूँ
क़िर्तास
भिगो
देता
हूँ
Shajar Abbas
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हज़रत-ए-दिल
थे
'शजर'
इश्क़
की
कश्ती
में
सवार
हिज्र
का
तूफ़ाँ
उठा
हज़रत-ए-दिल
डूब
गए
Shajar Abbas
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