ग़ज़लमेंदर्दअपनालिखरहाहूँ
तोमेरादर्दकुछकमहोरहाहै
शब-ए-महताबयेक्यामाजराहै
रूख़-ए-महताबमद्धमहोरहाहै
जोख़महोतानथाआगेकिसीके
तेरेआगेवोसरख़महोरहाहै
येमेरादिलनहींधड़केहैपागल
तेरीफ़ुर्क़तकामातमहोरहाहै
हमारेदोस्तोंमेंअक़रिबामें
तुम्हाराज़िक्रहरदमहोरहाहै
वोअपनीज़ुल्फ़कोलहरारहीहै
हसींयूँँआजमौसमहोरहाहै
ज़मानादेखकेहैरतज़दाहै
मेरादुश्मनक्यूँँहमदमहोरहाहै
मता-ए-जाँतुम्हारामुस्कुराना
मेरेज़ख़्मोंकामरहमहोरहाहै
क़दमजिसआबमेंवोरखरहीहै
शजरवोआब-ए-ज़मज़महोरहाहै