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Shajar Abbas
ham muhabbat kii ghazal ka hain mukammal matla
ham muhabbat kii ghazal ka hain mukammal matla | हम मुहब्बत की ग़ज़ल का हैं मुकम्मल मतला
- Shajar Abbas
हम
मुहब्बत
की
ग़ज़ल
का
हैं
मुकम्मल
मतला
मिस्रा-ए-ऊला
हूँ
मैं
मिस्रा-ए-सानी
तुम
हो
- Shajar Abbas
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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बहुत
आसान
है
कहना,
बुरा
क्या
है
भला
क्या
है
करोगे
इश्क़
तब
मालूम
होगा,
मसअला
क्या
है
Bhaskar Shukla
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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अपनी
मर्ज़ी
से
मैं
नहीं
आया
मुझको
लाया
गया
है
मय
खाना
Shajar Abbas
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हुस्न
की
मालिका
इजाज़त
दो
आपके
हुस्न
पे
ग़ज़ल
कह
दूँ
Shajar Abbas
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तेरी
आँखें
तेरे
रुख़सार
तेरे
लब
तेरा
चेहरा
मता-ए-जाँ
किसी
शायर
का
मुझको
ख़्वाब
लगता
है
Shajar Abbas
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ऐ
कनीज़ो
आप
के
सर
पर
रिदाऐं
देखकर
मुब्तिला
है
ख़ौफ़
में
ये
दौर-ए-हाज़िर
का
यज़ीद
आप
का
ज़ेवर
है
पर्दा
ख़ुद
को
परदे
में
रखो
दस्त
बस्ता
इल्तिजा
करते
हैं
ये
तुम
सेे
अबीद
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Shajar Abbas
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निकले
थे
जैसे
दोस्तों
आदम
बहिश्त
से।
कू-ए-बुताँ
से
ऐसे
निकाले
गए
हैं
हम।
Shajar Abbas
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