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Shajar Abbas
bahut din ho ga.e mahroom hooñ aziyat se
bahut din ho ga.e mahroom hooñ aziyat se | बहुत दिन हो गए महरूम हूँ अज़ीयत से
- Shajar Abbas
बहुत
दिन
हो
गए
महरूम
हूँ
अज़ीयत
से
ख़ुदा
के
वास्ते
आओ
मुझे
अज़ीयत
दो
- Shajar Abbas
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कहा
था
क्या
और
क्या
बने
हो
अजब
सा
इक
मसअला
बने
हो
हमारी
मर्ज़ी
कहाँ
थी
शामिल
तुम
अपने
मन
से
ख़ुदा
बने
हो
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Ritesh Rajwada
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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ख़ुदा
ख़ुदको
समझते
हो
तो
समझो
मगर
इक
रोज़
मर
जाना
है
तुमको
Shakeel Azmi
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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मेरी
दु'आ
है
और
इक
तरह
से
बद्दुआ
भी
है
ख़ुदा
तुम्हें
तुम्हारे
जैसी
बेटियाँ
अता
करे
Tehzeeb Hafi
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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ज़िंदगी
अपनी
जब
इस
शक्ल
से
गुज़री
'ग़ालिब'
हम
भी
क्या
याद
करेंगे
कि
ख़ुदा
रखते
थे
Mirza Ghalib
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उस
एक
शख़्स
ने
नज़रों
से
क्या
गिराया
मुझे
हर
एक
शख़्स
की
नज़रों
में
गिर
गया
हूँ
मैं
Shajar Abbas
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ख़्वाब
में
रोज़
मिलने
आते
हो
रु-ब-रु
भी
मिलो
कभी
आकर
Shajar Abbas
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इस
तरह
से
हसीन
शाम
करें
आओ
बैठो
कोई
कलाम
करें
यूँँ
बुज़ुर्गों
का
एहतिराम
करें
ये
मिलें
तो
दु'आ
सलाम
करें
आप
आँखें
हमारी
सम्त
करें
ता-कि
हम
आज
नोश
जाम
करें
क़ैस
लैला
जुदा
हुए
लिखकर
इश्क़
की
दास्ताँ
तमाम
करें
इश्क़
से
गर
कभी
मिले
फ़ुर्सत
हम
भी
फिर
कोई
काम
धाम
करें
हुस्न
वालों
से
इल्तिजा
है
शजर
मेरी
नींदें
न
यूँँ
हराम
करें
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Shajar Abbas
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यूँँ
लग
रहा
है
क़तरा-ए-मय
लब
पर
आपके
जैसे
किसी
गुलाब
की
पत्ती
पर
ओस
हो
Shajar Abbas
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सितम
की
घर
से
निकल
के
बाहर
मुख़ालिफ़त
कर
मुख़ालिफ़त
कर
क़दम
क़दम
पर
मुख़ालिफ़त
कर
Shajar Abbas
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