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Shajar Abbas
aajkal log chand paison men
aajkal log chand paison men | आजकल लोग चंद पैसों में
- Shajar Abbas
आजकल
लोग
चंद
पैसों
में
अपना
ईमान
बेच
देते
हैं
- Shajar Abbas
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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मैं
चीख़ता
रहा
कुछ
और
भी
है
मेरा
इलाज
मगर
ये
लोग
तुम्हारा
ही
नाम
लेते
रहे
Anjum Saleemi
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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सियाह
ज़ुल्फ़ें
थी
और
तिल
था
दाएं
बाज़ू
पर
अभी
भी
याद
हैं
ये
दो
निशानियां
उसकी
Shajar Abbas
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जब
तरक़्क़ी
याब
होते
देखा
दिल
के
चैन
को
बाप
की
आँखें
ख़ुशी
के
आँसुओं
से
तर
हुईं
Shajar Abbas
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लोग
मरते
हैं
हुस्न
पर
तेरे
और
मैं
सादगी
पर
मरता
हूँ
Shajar Abbas
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इस
तरह
से
हसीन
शाम
करें
आओ
बैठो
कोई
कलाम
करें
यूँँ
बुज़ुर्गों
का
एहतिराम
करें
ये
मिलें
तो
दु'आ
सलाम
करें
आप
आँखें
हमारी
सम्त
करें
ता-कि
हम
आज
नोश
जाम
करें
क़ैस
लैला
जुदा
हुए
लिखकर
इश्क़
की
दास्ताँ
तमाम
करें
इश्क़
से
गर
कभी
मिले
फ़ुर्सत
हम
भी
फिर
कोई
काम
धाम
करें
हुस्न
वालों
से
इल्तिजा
है
शजर
मेरी
नींदें
न
यूँँ
हराम
करें
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Shajar Abbas
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हमारे
नाम
को
सुनकर
तुम्हारा
शर्माना
बताओ
गर
ये
मोहब्बत
नहीं
तो
फिर
क्या
है
Shajar Abbas
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