shajar ko geet parindon ne ye sunaaya hai | 'शजर' को गीत परिंदों ने ये सुनाया है

  - Shajar Abbas
'शजर'कोगीतपरिंदोंनेयेसुनायाहै
शहरसलौटकेवोआजगाँवआयाहै
तूहैसाथमेंमेरेसाथसायाहै
येमुझपेकैसामुक़द्दरनेज़ुल्मढायाहै
ज़बानखोलरहेहैंवोसबहमारेखिलाफ़
केहमनेजिनकोमियाँबोलनासिखायाहै
जिसेतूअपनासमझताहैअपनाकहताहै
वोतेराअपनानहींहैंकोईपरायाहै
जोफ़र्दहरघड़ीरहताथामुब्तिलाग़ममें
ख़ुदाकाशुक्रहैवोआजमुस्कुरायाहै
हमारावास्ताहैक़ैसकेक़बीलेसे
यूँँहमनेसहराकोअपनामकाँबनायाहै
हमारीअपनीहीतन्हाईनेहमाराशजर
गलेलगाकेसदाहौसलाबढ़ायाहै
ख़ुदासशिकवाकरूँँगीयेजाकेमहशरमें
मुझे'शजर'नेख़ुदायाबहुतरुलायाहै
रौंदज़ेरेपेलिल्लाहऐसेगुलशन-ए-गुल
'शजर'नेइनकोरगोंकालहूपिलायाहै
  - Shajar Abbas
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