sada-e-kalb-e-hazi ko suno gar 'aashiq ho | सदा-ए-कल्ब-ए-हज़ी को सुनो गर 'आशिक़ हो

  - Shajar Abbas
सदा-ए-कल्ब-ए-हज़ीकोसुनोगर'आशिक़हो
येबस्तीछोड़केसहराचलोगर'आशिक़हो
तवाफ-ए-खा़ना-ए-काबाहैमोमिनोंकेलिए
तवाफ-ए-तुर्बत-ए-मजनूकरोगर'आशिक़हो
तुम्हारेवास्तेअच्छानहींयेबाब-ए-विसाल
केबाब-हिज्रकोदिलसेपढ़ोगर'आशिक़हो
यूँँंरोज़ख़्वाबमेंआनेसेफ़ाइदाक्याहै
तुमहमसेेरु-बा-रुआकरमिलोगर'आशिक़हो
वफ़ाकीराहमेंसाबिक़क़दमरखोअपने
जहानवालोंसेतुममतडरोगर'आशिक़हो
निशान-ए-तुर्बत-ए-लैलाक़ैसमिटसके
दिफ़ाहैआपपेवाजिबसुनोगर'आशिक़हो
अगरचेइश्क़पाआँचआईजाँलुटादेंगे
येबातबरसरेमहफ़िलकहोगर'आशिक़हो
खाओहाकिमोंकाखौफअनारकली
हमारेसीनेसेआकरलगोगर'आशिक़हो
यूँँंउसकीयादमेंरोनेसेकुछनहींहोगा
तुमउसकीयादमेंसिगरेटपियोगर'आशिक़हो
बग़ैरइश्क़किएज़िन्दगीअधूरीहै
क़लमउठाकेशजरयेलिखोगर'आशिक़हो
  - Shajar Abbas
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