rakkhi hai laaj aise sadaa etibaar kii | रक्खी है लाज ऐसे सदा एतिबार की

  - Shajar Abbas
रक्खीहैलाजऐसेसदाएतिबारकी
हमनेवफ़ाकीउनसेेशजरबेशुमारकी
करतेहैंइंतिज़ारतिराबसयेसोचकर
शायदयेइंतिहाहोतिरेइंतिज़ारकी
उसख़ूबरूसेचेहरेकेदीदारकेसिवा
कोईदवाबताओदिलबेक़रारकी
तीरतबरपेशामकेइनसूरमाओंपर
हावीहैरनमेंदेखोहँसीशीरख़्वारकी
हमअपनेदिलकेहाथोंथेमजबूरशजर
हमनेहरइकख़तायूँँतिरीदरकिनारकी
  - Shajar Abbas
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