rakha ghazal ka mawzoo naya ishq aur main | रक्खा ग़ज़ल का मौज़ू नया इश्क़ और मैं

  - Shajar Abbas
रक्खाग़ज़लकामौज़ूनयाइश्क़औरमैं
होंगेनहींकभीभीजुदाइश्क़औरमैं
हैंइकहसींकेलबकीदु'आइश्क़औरमैं
देतेहैंयेजहाँकोपताइश्क़औरमैं
येसोचताथारक्खूँग़ज़लकीरदीफ़क्या
इतनेमेंमेरेदिलनेकहाइश्क़औरमैं
जिसतरहरूहसाथमेंरहतीहैजिस्मके
रहतेहैंऐसेसाथसदाइश्क़औरमैं
बसतीनचीज़ेंलाइक़-ए-तस्लीमहैंशजर
येयादरखनामेराख़ुदाइश्क़औरमैं
  - Shajar Abbas
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