mehfil men tha ye fiqra labon par janab ke | महफ़िल में था ये फ़िक़रा लबों पर जनाब के

  - Shajar Abbas
महफ़िलमेंथायेफ़िक़रालबोंपरजनाबके
वाइज़मुरीदहैंतेरेहुस्न-ओ-शबाबके
बेहतरहैख़ुदकोनींदसेबेदारकरलोतुम
आँखोंसेउठपाएँगेयेलाशेख़्वाबके
तारीख़-ए-करबलाकायेमंज़रअजीबहै
तिश्ना-लबीसुलगतीहैसीनेमेंआबके
दिलफटरहाथाख़ौफ़सेज़ालिमकादेखकर
जबनारेहमलगानेलगेइंक़िलाबके
इकबावफ़ायेसदमालिएदिलपेमरगया
हैंसबअधूरेबाबवफ़ाकीकिताबके
करदेंगेख़ारहाथोंकोज़ख़्मीशजरमियाँ
गुलशनमेंगरक़रीबगएतुमगुलाबके
  - Shajar Abbas
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