koi shay hasb-e-zaroorat nahin mil paayegi | कोई शय हस्ब-ए-ज़रूरत नहीं मिल पाएगी

  - Shajar Abbas
कोईशयहस्ब-ए-ज़रूरतनहींमिलपाएगी
येहक़ीक़तहैहक़ीक़तनहींमिलपाएगी
जिस्ममिलजाएगादौलतसेज़मानेमेंमगर
आपकोसच्चीमोहब्बतनहींमिलपाएगी
इश्क़केसज्देअगरजीतेजीकरदोगेक़ज़ा
तोतुम्हेंइज़्ज़त-ओ-शोहरतनहींमिलपाएगी
इतनेग़मतोहफ़ेमेंदेदेगीमोहब्बततुमको
उम्रभररोनेसेफ़ुर्सतनहींमिलपाएगी
ऐसालगताहैशजरचेहरा-ए-रौशनकीतेरे
मुझकोजीतेजीज़ियारतनहींमिलपाएगी
  - Shajar Abbas
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