kal ye paighaam har ik peer-o-jawaan tak pahunchen | कल ये पैग़ाम हर इक पीर-ओ-जवाँ तक पहुँचे

  - Shajar Abbas
कलयेपैग़ामहरइकपीर-ओ-जवाँतकपहुँचे
हाल-ए-अफ़सुर्दामेंहमकू-ए-बुताँतकपहुँचे
उसनेपूछाथामेरीजानकहाँतकपहुँचे
मैनेहँसकरयेकहारिश्ता-ए-जाँतकपहुँचे
बहरेहोजाएँदु'आगोहूँयेदुनियावाले
उसकाजबनामख़ुदामेरीज़बाँतकपहुँचे
मेरेहाथोंपेयेपाज़ेबजोहैमेरेसनम
ख़्वाहिश-ए-कल्ब-ए-हज़ींहैतेरेपाँतकपहुँचे
जाकेहममौतकीआग़ोशमेंयूँँबैठगए
जैसेबिछड़ाहुआबच्चाकोईमाँतकपहुँचे
मैंनेख़तदेकेकबूतरकोकबूतरसेकहा
क़ासिद-ए-इश्क़मेराख़तयेफ़ुलाँतकपहुँचे
मेरीआवाज़पेलब्बैककहेंपीर-ओ-जवाँ
मेरीहलमिनकीसदासारेजहाँतकपहुँचे
ख़ूनसेहैलिक्खाहैतारीख़केऔराकोंपर
हक़बयाँकरनेकोहमनोक-ए-सिनाँतकपहुँचे
होंगेदीदारमय्यसरहमेंहूरोंकेवहाँ
दिलमेंअरमानलिएहमयेजिनाँतकपहुँचे
दास्ताँमेरेसफ़रकीयेहैअदनासीशजर
संगखातेहुएहमकूचा-ए-जाँतकपहुँचे
  - Shajar Abbas
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