jab bhi kabhi asiroon ki cheekhen nikal padeen | जब भी कभी असीरों की चीख़ें निकल पड़ीं

  - Shajar Abbas
जबभीकभीअसीरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
तोदफ़अतनशरीफ़ोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
करबोबलामेंशौक़-ए-शहादतकोदेखकर
ख़ंजरकीऔरतीरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
जबयेसुनाकेशामकाबाज़ारगया
ग़ैरतसेसबअसीरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
इतनेथेज़ख़्मदिलपेतेरीबेवफ़ाईके
दिलदेखकरतबीबोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
जबदोशपरसवेरोंकेरक्खाग़म-ए-हयात
बे-साख़्तासवेरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
हमनेजबअपनेख़ूनसेरौशनकिएचराग़
तोज़ुल्मकेसफ़ीरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
जबख़ुश्कहोंठहमनेरखेमौज-ए-बहरपर
शर्म-ओ-हयासेमौजोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
इकफूलकेलबोंपेतबस्सुमकोदेखकर
गुलशनमेंसारेख़ारोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
जबजबभीबेवफ़ाओंनेज़िक्र-ए-वफ़ाकिया
तोसुनकेबाज़मीरोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
पाँवकेछालेकाँटोंकेसीनोंपेजबरखे
तोदर्द-दुखसेकाँटोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
जबशोरयेहुआकेशजरकाटदीजिए
गुलशनमेंसबपरिंदोंकीचीख़ेंनिकलपड़ीं
  - Shajar Abbas
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