gulshan men baagbaan ke shole bhadak rahe hain | गुलशन में बाग़बाँ के शोले भड़क रहे हैं

  - Shajar Abbas
गुलशनमेंबाग़बाँकेशोलेभड़करहेहैं
आँखोंसेदेखोगुलकीआँसूटपकरहेहैं
तोहफ़ेमेंउसनेमुझकोकाग़ज़केजोदिएथे
येदेखमो'जिज़ातूवोगुलमहकरहेहैं
तस्वीरकोतुम्हारीआँखोंमेंअपनीलेकर
हमसुब्ह-ओ-शामदिलबरदरदरभटकरहेहैं
रहतेहैंदूरहमतोमयख़्वारीमय-कदेसे
क्यामाजराहैयारबहमक्यूँबहकरहेहैं
सहरामेंदेखोमुर्शिदसदियोंसेलेकेअबतक
चादरसेख़ाककीहमज़ख़्मोंकोढकरहेहैं
चेहरेसेअपनेउसनेबख़्शाहैनूरइनको
सूरजक़मरसितारेसबयूँँचमकरहेहैं
लगताहैगएहैंपरदेससेवोवापस
हमसेाएकेमकाँमेंकंगनखनकरहेहैं
बाद-ए-फिराक़-ए-हमदमयेहालहोगयाहै
दीवार-ओ-दरमेंअपनाहमसरपटकरहेहैं
सदियाँगुज़रचुकीहैंआनेवालेजा
पलकेबिछाके'आशिक़सबरस्तातकरहेहैं
गुलशनमेंकेदेखोशबनमहैंगुलकेलबपर
शाख़-ए-शजरपेबैठेपंछीचहकरहेहैं
मंज़रयेदिखरहाहैहुक्म-ए-बयाज़ीपाकर
हिजरतशजरनेकरदीपत्थरधड़करहेहैं
  - Shajar Abbas
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