dilrooba zaroori hai mahlaqa zaroori hai | दिलरूबा ज़रूरी है मह-लक़ा ज़रूरी है

  - Shajar Abbas
दिलरूबाज़रूरीहैमह-लक़ाज़रूरीहै
इश्क़केसफ़रकीअबइब्तिदाज़रूरीहै
बा-ख़ुदाज़रूरीहैबा-ख़ुदाज़रूरीहै
ज़ुल्मकेमुक़ाबिलमेंकर्बलाज़रूरीहै
इककलीयेगुलशनमेंकहरहीहैभँवरेसे
येशब-ए-जुदाईहैजागनाज़रूरीहै
हक़कोहक़नहींकहतेजोभीमौतकेडरसे
सुनिएऐसेलोगोंसेफ़ासलाज़रूरीहै
जिस्मजीतलेनेकोजीतनानहींकहते
रूहकाशजरसाहबजीतनाज़रूरीहै
  - Shajar Abbas
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