aaj apni jaan ke rukhsaar par ghazlein kahooñ | आज अपनी जान के रुख़सार पर ग़ज़लें कहूँ

  - Shajar Abbas
आजअपनीजानकेरुख़सारपरग़ज़लेंकहूँ
यानीअपनेसबसेेप्यारेयारपरग़ज़लेंकहूँ
जबतुम्हाराहुस्नबनसकताहोमौज़ू-ए-ग़ज़ल
तोमैंफिरक्यूँतीरऔरतलवारपरग़ज़लेंकहूँ
कशमाकशमेंहूँमुसलसलतेराचेहरादेखकर।
पहलेलबपरआँखोंयारूख़सारपरग़ज़लेंकहूँ
तेरीमर्ज़ीक्याहैमुझकोमेरेहाकिमबता
हिज्रपेग़ज़लेंकहूँयाप्यारपरग़ज़लेंकहूँ
तुमनेजोवा'दाकियाहैबोसेकाइतवारको
तुमइजाज़तदोतोउसइतवारपरग़ज़लेंकहूँ
आईनेकीतरहजान-ए-मनतेराकिरदारहै
दिलमेंआताहैतेरेकिरदारपरग़ज़लेंकहूँ
  - Shajar Abbas
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