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Shadab Shabbiri
teri aankhoñ men doob kar ik din
teri aankhoñ men doob kar ik din | तेरी आँखों में डूब कर इक दिन
- Shadab Shabbiri
तेरी
आँखों
में
डूब
कर
इक
दिन
जी
में
आता
है
ख़ुद-कुशी
कर
लूँ
- Shadab Shabbiri
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नहीं
नक़्शे
पे
है
दीवार
घर
की
मिरी
दीवार
पे
नक़्शा
बना
है
Shadab Shabbiri
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किसी
का
रिन्द
मयख़ाना
किसी
का
किसी
की
आँख
पैमाना
किसी
का
किसी
की
जान
ले
लेगा
किसी
दिन
किसी
से
यूँँ
ही
शरमाना
किसी
का
किसी
की
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दी
किसी
से
रूठ
कर
जाना
किसी
का
किसी
को
दे
गया
सहरा
नवर्दी
किसी
से
दूर
हो
जाना
किसी
का
किसी
के
साथ
जीने
की
तलब
में
किसी
पर
यूँँ
ही
मर
जाना
किसी
का
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Shadab Shabbiri
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नहीं
कोई
डर
है
फ़लाने
से
कह
दो
हथेली
पे
सर
है
फ़लाने
से
कह
दो
फ़लाने
से
कह
दो
कि
उनकी
नज़र
पर
हमारी
नज़र
है
फ़लाने
से
कह
दो
कहाँ
रात
थे
कल
फ़लाने
फ़लाने
हमें
सब
ख़बर
है
फ़लाने
से
कह
दो
जिसे
रात
दिन
वो
बताते
हैं
झूटा
वही
मो'तबर
है
फ़लाने
से
कह
दो
नहीं
दब
सकेगा
नहीं
रुक
सकेगा
हुजूमे-बशर
है
फ़लाने
से
कह
दो
डराना
जिसे
चाहते
हैं
फ़लाने
बहुत
वो
निडर
है
फ़लाने
से
कह
दो
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Shadab Shabbiri
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ख़ुदारा
मुझे
यूँँ
न
हैरत
से
देखो
यक़ीं
तो
करो
बाख़ुदा
बेखु़दी
है
Shadab Shabbiri
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बर्क़
दिल
पर
मिरे
गिराएगा
करके
वा'दा
वो
फिर
न
आएगा
Shadab Shabbiri
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