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Shadab Shabbiri
tere dar par to ham khade bhi nahin
tere dar par to ham khade bhi nahin | तेरे दर पर तो हम खड़े भी नहीं
- Shadab Shabbiri
तेरे
दर
पर
तो
हम
खड़े
भी
नहीं
यार
इतने
गिरे
पड़े
भी
नहीं
आप
छोटे
नहीं
हक़ीक़त
हैं
आप
लेकिन
बहुत
बड़े
भी
नहीं
- Shadab Shabbiri
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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हालत
जो
हमारी
है
तुम्हारी
तो
नहीं
है
ऐसा
है
तो
फिर
ये
कोई
यारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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एक
सीता
की
रिफ़ाक़त
है
तो
सब
कुछ
पास
है
ज़िंदगी
कहते
हैं
जिस
को
राम
का
बन-बास
है
Hafeez Banarasi
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
Kumar Vishwas
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थी
किताबी
किताब
में
गुज़री
ज़िन्दगी
सारी
ख़्वाब
में
गुज़री
उसके
दरबार
से
रहा
रिश्ता
उम्र
बस
जी
जनाब
में
गुज़री
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Shadab Shabbiri
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बेक़रारी
से
भी
ज़ियादा
कुछ
आज
कल
मुझको
बेक़रारी
है
Shadab Shabbiri
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बहुत
कुछ
चीज़
पाने
की
हवस
में
जो
कुछ
भी
था
गवाएँ
जा
रहे
हैं
Shadab Shabbiri
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जुनून-ए-इश्क़
में
ये
बेख़ुदी
का
आलम
है
ख़ुद
अपने
शहर
में
अपना
मकान
भूल
गए
Shadab Shabbiri
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ब-वक़्त-ए-मर्ग
पानी
मुँह
में
टपकाते
तो
अच्छा
था
ख़ुदाया
वो
अयादत
को
चले
आते
तो
अच्छा
था
Shadab Shabbiri
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