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Shadab Shabbiri
jab ki gumnaam hain mohalle men
jab ki gumnaam hain mohalle men | जब कि गुमनाम हैं मुहल्ले में
- Shadab Shabbiri
जब
कि
गुमनाम
हैं
मुहल्ले
में
कैसे
कह
दें
कि
हम
सुख़न-वर
हैं
- Shadab Shabbiri
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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कमाने
का
कोई
ज़रिया
नहीं
होती
ये
फनकारी
मगर
फ़ाक़े
बिता
कर
कोई
शायर
जी
नहीं
सकता
AYUSH SONI
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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अच्छे
शे'र
सुनाने
वाले
लड़के
सुन
अच्छे
शायर
तन्हा
ही
रह
जाते
हैं
Ritesh Rajwada
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देखो
तुम
ने
इश्क़
किया
है
शायर
से
शे'र
कहेगा
ज़ेवर
थोड़ी
ला
देगा
Kumar Kaushal
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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मेरे
शायर!
मैं
वही
हुस्ने-दिलावेज़,
जिसे
चाहने
वाले
बहुत,
जानने
वाले
कम
हैं
Subhan Asad
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तेरे
बग़ैर
भी
जी
कर
दिखा
दिया
मैंने
दुआएँ
दे
तुझे
शाइर
बना
दिया
मैंने
Anjum Rehbar
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वो
पूछते
फिरते
हैं
मेरे
बारे
में
सब
सेे
इक
मेरा
भी
शायर
है
उसे
तुमने
सुना
क्या?
Nawaz Deobandi
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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यूँँ
तो
कोई
भी
बे-लिबास
न
था
फिर
भी
लगता
था
बे-लिबासी
थी
उस
से
मिल
कर
ख़ुशी
हुई
थी
मुझे
और
फिर
देर
तक
उदासी
थी
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Shadab Shabbiri
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क़िस्सा-ए-ज़ीस्त
मुख़्तसर
है
अब
हर
दवा
यार
बे-असर
है
अब
Shadab Shabbiri
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ज़िन्दगी
भर
यही
इक
काम
किया
है
मैंने
अपने
दुख
दर्द
को
नीलाम
किया
है
मैंने
जुर्म
समझा
है
जिसे
अहले-ख़िरद
ने
शादाब
हाँ
वही
जुर्म
सरे-आम
किया
है
मैंने
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Shadab Shabbiri
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पैरवी
कर
रहा
हूँ
ग़ालिब
की
आम
खाता
हूँ
शे'र
कहता
हूँ
Shadab Shabbiri
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एक
इक
लफ्ज़
में
मज़ा
आया
क्या
अदा
थी
तेरी
शिकायत
में
Shadab Shabbiri
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