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Shadab Shabbiri
aaj phir yaad aa gaii unki
aaj phir yaad aa gaii unki | आज फिर याद आ गई उनकी
- Shadab Shabbiri
आज
फिर
याद
आ
गई
उनकी
फिर
हुईं
आज
तर-बतर
आँखें
- Shadab Shabbiri
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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लौट
कर
नहीं
आता
कब्र
से
कोई
लेकिन
प्यार
करने
वालों
को
इंतज़ार
रहता
है
Shabeena Adeeb
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जब
बुलंदी
का
गुमाँ
था
तो
नहीं
याद
आई
अपनी
परवाज़
से
टूटे
तो
ज़मीं
याद
आई
वही
आँखें
कि
जो
ईमान-शिकन
आँखें
हैं
उन्हीं
आँखों
की
हमें
दावत-ए-दीं
याद
आई
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Subhan Asad
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आप
की
याद
आती
रही
रात
भर
चश्म-ए-नम
मुस्कुराती
रही
रात
भर
Makhdoom Mohiuddin
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
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'अमीर'
अब
हिचकियाँ
आने
लगी
हैं
कहीं
मैं
याद
फ़रमाया
गया
हूँ
Ameer Minai
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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जिस
रात
ख़ुद-कुशी
के
मुझे
आए
थे
ख़याल
उस
रात
मैंने
शे'र
कहे
और
सो
गया
Tanoj Dadhich
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बराए
नाम
ही
शादाब
हूँ
मैं
मिरा
अपना
कोई
मंज़र
नहीं
है
Shadab Shabbiri
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किसी
का
रिन्द
मयख़ाना
किसी
का
किसी
की
आँख
पैमाना
किसी
का
किसी
की
जान
ले
लेगा
किसी
दिन
किसी
से
यूँँ
ही
शरमाना
किसी
का
किसी
की
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दी
किसी
से
रूठ
कर
जाना
किसी
का
किसी
को
दे
गया
सहरा
नवर्दी
किसी
से
दूर
हो
जाना
किसी
का
किसी
के
साथ
जीने
की
तलब
में
किसी
पर
यूँँ
ही
मर
जाना
किसी
का
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Shadab Shabbiri
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मौत
आसान
नहीं
थी
लेकिन
हमने
जी
कर
इसे
आसानी
दी
Shadab Shabbiri
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ग़ुर्बत
का
ऐलान
करोगे
अपना
ही
नुक़सान
करोगे
ख़ुद
खोए
खोए
रहते
हो
मेरा
क्या
तुम
ध्यान
करोगे
बुरा
भला
तुम
मुझको
कह
कर
काम
मिरा
आसान
करोगे
फ़र्ज़
अदा
ही
करोगे
अपना
मुझ
पर
क्या
एहसान
करोगे
कन्याओं
के
दुश्मन
हो
तुम
तुम
क्या
कन्यादान
करोगे
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Shadab Shabbiri
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वो
मिरी
सम्त
उछालेगा
खिलौने
शादाब
और
हम
उस
सेे
बहल
जाएँगे
उम्मीद
न
थी
Shadab Shabbiri
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