yaad | "याद"

  - SHABAN NAZIR
"याद"
यक़ीननतुमभीमेरेबारेकभीसोचतेहोगे
भलेहीइकभटकतीमुख़्तसरसीयादजाए
कभीबीतेहुएलम्हातकीएकख़ुशनुमाझलकी
किसीदिनख़्वाबकेरस्तेअचानकसामनेआए
कभीऐसाभीहोताहोकिमेरीशा'इरीकोतुम
हमारीयादमेंखोकरउसेतन्हाजोपढ़तेहो
तोउनअल्फ़ाज़सेमेरीकभीआवाज़आतीहो
तुम्हारीलब-कुशाईहोतीहैजबमेरीग़ज़लोंसे
यक़ींजानोतोमुझकोयेमालूमहोताहै
तुम्हारेलबपेजानेकायेअच्छातरीक़ाहै
वहींसेफूलकीमानिंदतुम्हारेलबसेझड़ताहूँ
किजैसेफूलझड़तेहैंतुम्हारेबातकरनेसे
मगरमैंसोचताहूँफूलहूँतोफूलकैसाहूँ
मिरीजाँकुछतोगुलज़ेर-ए-चमनऐसेभीहोतेहैं
किजोख़ुशबूनहींदेतेमगरदिल-कशभीहोतेहैं
उन्हींदिलकशनज़ारोंकामैंइकऐसाहिस्साहूँ
किजोख़ुशबूतोदेताहैमगरदिलकशनहींहोता
मगरअफ़सोसहैकिज़िन्दगीकुछऔरहीशयहै
इसेख़ुशबूपरस्तीकादिखावाख़ूबआताहै
मुक़ाबिलदिल-कशीकेसामनेख़ुशबू-परस्तीहो
यक़ीननज़िंदगीभीहोहोदिलकशकोचुनतीहै
ज़रासीदेरमेंहीमैंभीक्या-क्यासोचलेताहूँ
मैंतुमकोयादकरकेयेअक्सरसोचताहूँबस
पूरेदिनपूरीरातभलेहीचंदसेलम्हात
यक़ीननतुमभीमेरेबारेकभीसोचतेहोगे।
  - SHABAN NAZIR
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