guzishta zindagi ke saare hi haalaat likh baitha | गुज़िश्ता ज़िन्दगी के सारे ही हालात लिख बैठा

  - SHABAN NAZIR
गुज़िश्ताज़िन्दगीकेसारेहीहालातलिखबैठा
ख़्याल-ए-यारमेंआकरमैंसबजज़्बातलिखबैठा
किसीकेदर्दसेवाक़िफ़नहींहूँफिरभीजानेक्यूँ
मैंअपनीबातकेबाइससभीकीबातलिखबैठा
मुहब्बतहैयहीयारोंयहीअंजामहैइसका
मैंअपनीजीतकेक़िस्सेसुनाकरमातलिखबैठा
ख़यालोंमेंतिरेगेसूक़लममेंहैतिराकाजल
तसव्वुरमेंअमावसकीअँधेरीरातलिखबैठा
मुझेमालूमहीक्याथाख़िज़ाँपेबातकरनीथी
तुम्हेंदेखातोमैंभीदफ़'अतनबरसातलिखबैठा
  - SHABAN NAZIR
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