jahaan par shaam se milti hui ik bhor hai shaayad | जहाँ पर शाम से मिलती हुई इक भोर है शायद

  - Surendra Bhatia "Salil"
जहाँपरशामसेमिलतीहुईइकभोरहैशायद
वहींपरउसकेमेरेवस्लकाइककोरहैशायद
फ़क़तइकख़्वाबमेंहूँख़्वाबहूँयाहूँहक़ीक़तमैं
मेरीपरवाज़मेंउसकाहीकोईज़ोरहैशायद
मैंउसकोदूरसेदेखूँतोलगताहैसुकूँजैसा
जोख़ुदमेंझाँककरदेखूँतोकोईशोरहैशायद
तलबइतनीज़ियादाहैमगरउतनीहीहैदूरी
मुझेऔरउसकोबाँधेदिलकीकोईडोरहैशायद
वोमेरेरंगलेमुझसेेमुझेहीरंगदेताहै
नहींरंगरेज़परसीरतकाकोईचोरहैशायद
  - Surendra Bhatia "Salil"
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