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Sachin Sharma
ek kamre si zindagi meri
ek kamre si zindagi meri | एक कमरे सी ज़िंदगी मेरी
- Sachin Sharma
एक
कमरे
सी
ज़िंदगी
मेरी
मेज़
कुर्सी
से
दोस्ती
मेरी
मोहतरम
जौन
याद
आते
हैं
चीख़ती
है
ये
ख़ामुशी
मेरी
जौन
को
याद
करता
हूँ
हरदम
अस्ल
में
है
ये
नौकरी
मेरी
जौन
को
सुनना
शे'र
कहना
है
जौन
से
ही
है
आशिक़ी
मेरी
जौन
सा
तजरबा
नहीं
है
तो
उम्र
कम
होगी
वाक़ई
मेरी
आपके
इल्म
में
इज़ाफ़ा
हो
जौन
पे
लिक्खी
शा'इरी
मेरी
शहर
में
लोग
कहते
हैं
पागल
जौन
जैसी
है
ज़िन्दगी
मेरी
मुस्कुराने
लगे
हैं
ये
पत्थर
जी
अनोखी
है
बुतगरी
मेरी
कहती
है
होंठों
से
लगाए
हो
छीनी
राधा
ने
बाँसुरी
मेरी
बहर
में
शे'र
कहना
सिखला
दूँ
आप
देखें
ये
रहबरी
मेरी
बस
ग़लत
को
ग़लत
कहा
था
तो
हो
गई
उन
से
दुश्मनी
मेरी
- Sachin Sharma
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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हुआ
जौन
को
पढ़
के
मालूम
ये
उदासी
का
भी
इक
कलर
होता
है
Viru Panwar
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एक
ग़ज़ल
से
जिसकी
मूरत
मैंने
आज
बनाई
है
एक
दफ़ा
जो
वो
पढ़
ले
तो
प्राण
प्रतिष्ठा
हो
जाए
Tanoj Dadhich
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इल्म
जब
होगा
किधर
जाना
है
हाए
तब
तक
तो
गुज़र
जाना
है
Madan Mohan Danish
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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हमको
रब
ने
कान
दिए
हैं
लेकिन
मुँह
सिलकर
भेजा
है
Sachin Sharma
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हमको
नफ़रत
है
मुहब्बत
से,
कि
हमने
महफ़िलो
में
देखा
है
रोता
हुआ
जॉन
Sachin Sharma
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जी
क्या
मेरा
हर
बार
सहना
सही
है
यहाँ
चोर
को
चोर
कहना
सही
है
गुलामी
तो
मैं
करके
ऊपर
न
जाँऊ
हमारा
ज़मीं
पे
ही
रहना
सही
है
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Sachin Sharma
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वो
उधर
फूलों
की
सेज
पर
है
ज़िन्दगी
आख़िरी
स्टेज
पर
है
बात
जो
सखियाँ
करवा
रही
थीं
उनका
भी
फोन
इंगेज
पर
है
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Sachin Sharma
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हम
तो
चाह
रहे
हैं
नज़र
लग
जाए
पर
चेहरे
का
तिल
दरबान
बना
है
Sachin Sharma
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