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Siddharth Saaz
tu bujha kar rakh gaya tha jabse is dil ke charaaghh
tu bujha kar rakh gaya tha jabse is dil ke charaaghh | तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़
- Siddharth Saaz
तू
बुझा
कर
रख
गया
था
जबसे
इस
दिल
के
चराग़
हमने
इस
घर
में
नहीं
की
रौशनाई
आज
तक
- Siddharth Saaz
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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तमाम
दुनिया
में
तीरगी
है
मगर
इक
अंदर
की
रौशनी
है
कभी
तो
लगता
है
ख़त्म
कर
दूँ
प
जब
तू
हँस
के
पुकारती
है
तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
तिरे
बिना
ज़िंदगी
ये
हमको
कि
जैसे
खाने
को
दौड़ती
है
तेरे
दीवाने
का
हारना
भी
तेरे
दीवाने
की
जीत
ही
है
मैं
तेरा
होकर
भी
तन्हा
तन्हा
भटक
रहा
हूँ
ये
बेघरी
है
तू
जिसपे
चढ़
के
उतर
गई
थी
वो
दिल
की
कश्ती
वहीं
खड़ी
है
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Siddharth Saaz
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वो
जब
जब
ज़्यादा
ग़ुस्से
में
होती
है
बादल
घिर
आते
हैं
पूरी
बस्ती
पर
Siddharth Saaz
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