deewaanon ka ghar uske jo lashkar ho raha hai | दीवानों का घर उसके जो लश्कर हो रहा है

  - Saket Gupta Saaki
दीवानोंकाघरउसकेजोलश्करहोरहाहै
जानेवोकिसेआजमुयस्सरहोरहाहै
वोराजकुमारीतोनहींहैकोईलेकिन
पानेकोउसेफिरभीस्वयंवरहोरहाहै
इससालकेआख़िरमेंमिलेंगेयेकहाथा
बसयाददिलादूँकिदिसंबरहोरहाहै
पत्थरकीतरहलोगहैंक्यूँँसोचताथामैं
अबसमझाहूँजबदिलमिरापत्थरहोरहाहै
इकवक़्तजोलगताथाकभीहोनहींसकता
हमदेखरहेहैंवहीअक्सरहोरहाहै
  - Saket Gupta Saaki
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