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Rohit tewatia 'Ishq'
tumhaara zikr kabhi ho to meri aankhoñ men
tumhaara zikr kabhi ho to meri aankhoñ men | तुम्हारा ज़िक्र कभी हो तो मेरी आँखों में
- Rohit tewatia 'Ishq'
तुम्हारा
ज़िक्र
कभी
हो
तो
मेरी
आँखों
में
भले
हो
दर्द
ज़ियादा
प
बर्क़
दिखती
है
- Rohit tewatia 'Ishq'
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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जहाँ
भर
से
बग़ावत
की
गई
थी
वो
इक
लड़की
ज़रूरत
की
गई
थी
उसी
ने
ही
सिखाया
हद
में
रहना
जिसे
बेहद
मोहब्बत
की
गई
थी
कभी
ये
सोचती
हो
या
नहीं
तुम
तुम्हारी
जाँ
इबादत
की
गई
थी
तुम्हें
इन
कंगनों
की
चाह
कैसी
खनक
तुमको
अमानत
की
गई
थी
हमीं
थे
उन
के
दीवाने
हमीं
को
रुलाने
तक
की
ग़फ़लत
की
गई
थी
इन
आँखों
का
हमेशा
ख़्वाब
थी
वो
प
ख़्वाबों
में
हक़ीक़त
की
गई
थी
कभी
उठते
थे
दोनों
हाथ
उसको
कभी
पीरों
से
मिन्नत
की
गई
थी
सभी
उसको
क़यामत
कह
रहे
हैं
मगर
किसकी
बदौलत
की
गई
थी
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Rohit tewatia 'Ishq'
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तुम्हें
इतना
बताना
है
कि
तुमको
जानता
हूँ
मैं
बदलते
मैसेजों
से
सब
ख़बर
हो
जाती
है
मुझको
Rohit tewatia 'Ishq'
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जाने
रिश्ते
को
ये
कैसा
मोड़
दिया
फूल-सी
लड़की
का
कैसे
दिल
तोड़
दिया
जब
भी
तुमको
जाना
हो
बतला
देना
मैं
सब
सेे
कह
दूँगा
मैने
छोड़
दिया
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Rohit tewatia 'Ishq'
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हमने
उन्हें
कहा
कि
हमें
वक़्त
चाहिए
थोड़ा
अगर
तमाम
का
मतलब
नहीं
पता
Rohit tewatia 'Ishq'
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मुझको
यक़ीन
सिर्फ़
मेरे
हौसले
पे
है
मैं
जानता
हूँ
साथ
कोई
नाख़ुदा
नहीं
Rohit tewatia 'Ishq'
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