apne gham ko main yuñ badhaata hooñ | अपने ग़म को मैं यूँँ बढ़ाता हूँ

  - Rohit tewatia 'Ishq'
अपनेग़मकोमैंयूँँबढ़ाताहूँ
उससेेमिलनेख़ुशीसेजाताहूँ
एकदीवारगिरतीजातीहै
एकतस्वीरजोहटाताहूँ
येभीकुछकमनहींकिसबकोमैं
कामपड़नेपेयादआताहूँ
कोईदेखेउदासहूँकितना
जबउदासीमेंमुस्कुराताहूँ
चुपसारहनेलगाहूँलोगोंमें
शोरतन्हाईमेंमचाताहूँ
मिलनामुमकिननहींहक़ीक़तमें
सोउसेख़्वाबमेंबुलाताहूँ
यूँँतोडरतानहींज़मानेसे
वोजोदेखेतोकाँपजाताहूँ
मुझकोवोभीडुबाकेजातेहैं
मैंजिन्हेंतैरनासिखाताहूँ
सरपेचढ़तीहैजबमेरेदुनिया
माँकेक़दमोंमेंबैठजाताहूँ
मैंनेक्याशौक़पालरक्खेहैं
इश्क़करताहूँदिलजलाताहूँ
  - Rohit tewatia 'Ishq'
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