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Saahir
zindagi pahle jaisi hoti jaayegi
zindagi pahle jaisi hoti jaayegi | ज़िंदगी पहले जैसी होती जाएगी
- Saahir
ज़िंदगी
पहले
जैसी
होती
जाएगी
जैसे-जैसे
उम्र
ये
ढ़लती
जाएगी
- Saahir
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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तू
कहानी
ही
के
पर्दे
में
भली
लगती
है
ज़िन्दगी
तेरी
हक़ीक़त
नहीं
देखी
जाती
Akhtar Saeed Khan
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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चाहता
हूँ
कि
मैं
रोऊँ
उस
में
चाहिए
मुझको
अब
यार
का
दुख
Saahir
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हम
दोनों
को
एक
किया
है
कुछ
ऐसे
भी
मैंने
अपनी
इक
तस्वीर
लगाई
तेरे
दिए
छल्ले
में
Saahir
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एक
बाप
उतरा
है
ज़िस्मफ़रोशी
के
धंधे
में
दस
घण्टों
की
ख़ातिर
मेरा
ज़िस्म
आपका
मालिक
Saahir
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सीने
में
जो
दबी
आग
है
ना
उसे
मैं
बढ़ाता
रहा
आँख
के
पानी
से
Saahir
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मुझको
कितना
घोर
दुख
है
मेरे
चारों
ओर
दुख
है
चैन
चोरी
हो
गया
है
और
इसका
चोर
दुख
है
मैंने
चुप
रहना
कहा
था
क्यूँ
मचाया
शोर
दुख
है
जिनको
शब
अच्छी
लगे
है
उन
सभी
को
भोर
दुख
है
ज़िंदगी
की
डोरी
का
इक
छोर
सुख
इक
छोर
दुख
है
सुख
के
सारे
मोतियों
को
बाँधे
है
जो
डोर
दुख
है
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Saahir
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