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Saahir
ik aisi duniya ban sakti hai kya jis
ik aisi duniya ban sakti hai kya jis | इक ऐसी दुनिया बन सकती है क्या जिस
- Saahir
इक
ऐसी
दुनिया
बन
सकती
है
क्या
जिस
में
हो
ये
सब
लड़की
कांटे
और
बनें
सब
लड़के
फूल
- Saahir
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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तोहफ़ा,
फूल,
शिकायत,
कुछ
तो
लेकर
जा
इश्क़
से
मिलने
ख़ाली
हाथ
नहीं
जाते
Tanoj Dadhich
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गूँध
के
गोया
पत्ती
गुल
की
वो
तरकीब
बनाई
है
रंग
बदन
का
तब
देखो
जब
चोली
भीगे
पसीने
में
Meer Taqi Meer
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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इश्क़
हमारा
ख़त्म
हुआ
आँखों
पे
पकड़े
गए
पहली
चिट्ठी
लिखने
पर
Saahir
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मैं
अलकनन्दा
सा
होता
और
वो
मंदाकनी
सी
फिर
कहीं
पर
साथ
मिलते
और
गंगा
होते
जाते
Saahir
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मैं
आधा
हो
रक्खा
हूँ
अंदर
से
लेकिन
पूरा
दिखता
हूँ
बाहरस
आज
दिवाली
है
बाबा
सो
घर
को
थोड़ा
जल्दी
आ
जाना
दफ़्तर
से
इकलौते
बेटे
को
मजबूरी
ने
त्योंहारों
पर
दूर
रखा
है
घर
से
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Saahir
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काश
ज़िंदगी
भी
कुछ
फिल्मी
होती
अंत
में
सब
अच्छा
होता
परदे
पर
Saahir
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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