latk chuka tha main tum se bichhad ke pankhe par | लटक चुका था मैं तुम से बिछड़ के पँखे पर

  - Rehan Mirza
लटकचुकाथामैंतुमसेबिछड़केपँखेपर
उठायाकेमुझेशा'इरीनेकाँधेपर
कभीजोपूरेकेपूरेचमनकामालिकथा
उसीनेकरलियासमझौताएकगमलेपर
येराह-ए-इश्क़ज़राभीसहलनहींहोती
मैंचलरहाहूँबहुतहीमहीनधागेपर
यहाँजोरहनाहैचेहरेबदलनासीखोफिर
यहाँगुज़ारानहींहोगाएकचेहरेपर
तमामउम्रवोशीशोंसेदूरभागेगा
हमाराख़ूनलगादेनाजजकेमाथेपर
सहाराउसकोबुढ़ापेमेंबेटीनेबख़्शा
ग़ुरूरथाजिसेअपनेजवानबेटेपर
  - Rehan Mirza
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