jab tak ke zakhm kaanton se khaaya nahin gaya | जब तक के ज़ख़्म काँटों से खाया नहीं गया

  - Rehan Mirza
जबतककेज़ख़्मकाँटोंसेखायानहींगया
फूलोंकीबज़्ममेंमैंबुलायानहींगया
इनकारएकबारकिसीदरसेजबहुआ
मैंक्यावहाँपेफिरमेरासायानहींगया
वोफूलथातोफूलकोसरपेसजायाहै
मैंबोझथातोबोझउठायानहींगया
मेरातोपेटभरदियाबातोंनेआपकी
सोआजमुझसेेखानाभीखायानहींगया
कुछइसलिएभीज़िन्दगीतारीकीमेंकटी
हमसेचराग़उठकेजलायानहींगया
  - Rehan Mirza
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