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Ravi 'VEER'
tiri saadgi par lutaaya jahaan tha
tiri saadgi par lutaaya jahaan tha | तिरी सादगी पर लुटाया जहाँ था
- Ravi 'VEER'
तिरी
सादगी
पर
लुटाया
जहाँ
था
मिरी
जाँ
बता
सादगी
वो
कहाँ
है?
- Ravi 'VEER'
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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रहते
थे
कभी
जिन
के
दिल
में
हम
जान
से
भी
प्यारों
की
तरह
बैठे
हैं
उन्हीं
के
कूचे
में
हम
आज
गुनहगारों
की
तरह
Majrooh Sultanpuri
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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बोसा
लिया
जो
उस
लब-ए-शीरीं
का
मर
गए
दी
जान
हम
ने
चश्मा-ए-आब-ए-हयात
पर
Ameer Minai
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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मैंने
ही
आवाज़
नहीं
दी
थी
वरना
जाने
वाले
रोके
भी
जा
सकते
थे
Ravi 'VEER'
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हाथों
में
आपके
ये
जो
गुलाब
आज
है
मेरे
लिए
हो
लाए
या
मिला
कहीं
से
है
Ravi 'VEER'
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ख़ुद
का
दिल
बहलाना
सीखो
आँसू
को
पी
जाना
सीखो
मैख़ानों
में
क्या
रक्खा
है
शाम
पड़े
घर
जाना
सीखो
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Ravi 'VEER'
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हमने
तो
मुस्कुराकर
सब
कुछ
बयाँ
किया
था
उसको
भी
है
मोहब्बत
ये
कौन
जानता
है
Ravi 'VEER'
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चाहने
वाले
तेरे
होंगे
यहाँ
पूरे
शहर
में
पर
मेरा
वा'दा
है
तुझ
सेे
इश्क़
मैं
ज़्यादा
करूँँगा
Ravi 'VEER'
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