hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ravi 'VEER'
tire bin mire din ye kate nahin hai
tire bin mire din ye kate nahin hai | तिरे बिन मिरे दिन ये कटते नहीं है
- Ravi 'VEER'
तिरे
बिन
मिरे
दिन
ये
कटते
नहीं
है
बता
क्या
करें
हम
अगर
रात
हो
तो
- Ravi 'VEER'
Download Sher Image
क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
Read Full
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
44 Likes
मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
Send
Download Image
61 Likes
कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
Send
Download Image
42 Likes
ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
Send
Download Image
43 Likes
रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
Send
Download Image
48 Likes
दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
Send
Download Image
122 Likes
उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
Send
Download Image
36 Likes
किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
Send
Download Image
53 Likes
इक
रात
वो
गया
था
जहाँ
बात
रोक
के
अब
तक
रुका
हुआ
हूँ
वहीं
रात
रोक
के
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
50 Likes
रात
सोने
के
लिए
दिन
काम
करने
के
लिए
वक़्त
मिलता
ही
नहीं
आराम
करने
के
लिए
Jamal Ehsani
Send
Download Image
41 Likes
Read More
डगर
मुश्किल
मगर
है
हौसले
पुरज़ोर
सीने
में
रगों
में
रक्त
है
उबला
मचा
है
शोर
सीने
में
सफ़र
में
मुश्किलें
क्या
ख़ाक
रोकेगी
मेरा
रस्ता
नज़र
में
मंज़िलें
और
आग
है
घनघोर
सीने
में
Read Full
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
8 Likes
जीवन
टेड़ा
मेड़ा
रस्ता
होता
है
मौत
हमेशा
सीधे
रस्ते
आती
है
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
1 Like
वतन
में
है
नहीं
कोई
भी
हिंदुस्तान
के
जैसा
मुझे
मेरा
वतन
मेरी
ज़मीन-ए-हिंद
प्यारी
है
कईं
सारे
यहाँ
पर
रंग
भाषा
और
कलाओं
के
हमारा
मान
और
पहचान
ये
हिंदी
हमारी
है
Read Full
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
5 Likes
क्या
हो
गर
गुमनाम
ख़ज़ाने
मिल
जाएँ
यानी
फिर
वो
यार
पुराने
मिल
जाएँ
जिनके
साथ
में
गुज़रा
बचपन
सारा,
वो
मिल
जाएँ
तो
यार
ज़माने
मिल
जाएँ
मंज़िल
की
ख़ातिर
जो
निकले
हैं
घर
से
उनको
मंज़िल
ठौर
ठिकाने
मिल
जाएँ
चाय
के
प्याले
भी
करते
हैं
याद
उन्हें
कहते
हैं
इक
बार
दीवाने
मिल
जाएँ
Read Full
Ravi 'VEER'
Download Image
1 Like
मैं
सच
कहता
हूँ
अब
वो
मर
भी
जाए
तो
मेरी
जानिब
से
कोई
इशारा
नईं
होगा
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
4 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Poverty Shayari
Gussa Shayari
Raqeeb Shayari
Zulf Shayari
Tanhai Shayari