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Ravi 'VEER'
khoobsurat pairhan hai khoobsurat ye ada
khoobsurat pairhan hai khoobsurat ye ada | ख़ूब-सूरत पैरहन है ख़ूब-सूरत ये अदा
- Ravi 'VEER'
ख़ूब-सूरत
पैरहन
है
ख़ूब-सूरत
ये
अदा
और
उस
पर
मुस्कुराहट
जँच
रही
हो
आज
तुम
- Ravi 'VEER'
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न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
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तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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लौट
जाती
है
उधर
को
भी
नज़र
क्या
कीजे
अब
भी
दिलकश
है
तेरा
हुस्न
मगर
क्या
कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
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मैं
तो
मुश्ताक़
हूँ
उस
दिन
का
अज़ल
से
'ज़ामी'
कब
बपा
हश्र
हो
कब
उन
का
मैं
जल्वा
देखूँ
Parvez Zaami
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हम
तो
तमाम
उम्र
तिरी
ही
अदा
रहे
ये
क्या
हुआ
कि
फिर
भी
हमीं
बे-वफ़ा
रहे
Jameel Malik
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
Ada Jafarey
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कोई
तो
रस्ता
बता
दो
किस
जगह
ख़ुशियाँ
मिलेगी
मैं
भला
ये
इश्क़
के
ग़म
कब
तलक
ढोया
करूँँगा
Ravi 'VEER'
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हम
हैं
सरल
तो
क्या
करे
बिन
मोल
ही
बिक
जाए
हम
हासिल
करे
क्या
ख़ाक
अब
क्या
ख़ाक
में
मिल
जाए
हम
Ravi 'VEER'
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मुझे
लगता
रहा
रस्ते
बहुत
आसान
होंगे
पर
चला
जब
मैं
तो
काँटे
फूल
से
ज़्यादा
मिले
मुझको
Ravi 'VEER'
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इस
फ़रेबी
से
जहाँ
में
ढूँढ़
लो
तुम
भी
कोई
जो
तुम्हारे
आँसुओं
को
देखकर
रोने
लगे
Ravi 'VEER'
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कल
अचानक
वाक़िया
ये
हो
गया
मैं
तबस्सुम
देख
उसकी
खो
गया
उसकी
आँखें
नींद
मेरी
ले
गई
फिर
न
जाने
कब
सवेरा
हो
गया
वो
वहाँ
बिस्तर
में
सोई
थी
मगर
एक
पागल
सीढ़ियों
पर
सो
गया
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Ravi 'VEER'
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