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Ravi 'VEER'
kya kahega ye zamaana soch mat
kya kahega ye zamaana soch mat | क्या कहेगा ये ज़माना, सोच मत
- Ravi 'VEER'
क्या
कहेगा
ये
ज़माना,
सोच
मत
गर
तुझे
है
दिल
लगाना,
सोच
मत
राह
में
काँटे
मिलेंगे
हर
तरफ़
गर
तुझे
है
फूल
पाना,
सोच
मत
कुछ
यक़ीनन
रूठ
जाएँगे
यहाँ
पर
उन्हें
कैसे
मनाना,
सोच
मत
इश्क़
में
बदनाम
होना
तो
यहाँ
रस्म
है
इक
जावेदाना,
सोच
मत
राब्ता
होगा
तेरा
हर
शख़्स
से
कौन
पागल
कौन
दाना,
सोच
मत
चाहता
है
तू
उसे
ये
याद
रख
कौन
है
उसका
दीवाना,
सोच
मत
सोच
अब
कैसे
तुझे
पाना
उसे
किस
तरह
उसको
भुलाना,
सोच
मत
'वीर'
गर
चाहत
है
तुझको
जिस्म
की
बंद
कर
मिलना
मिलाना,
सोच
मत
- Ravi 'VEER'
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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हज़ार
बर्क़
गिरे
लाख
आँधियाँ
उट्ठें
वो
फूल
खिल
के
रहेंगे
जो
खिलने
वाले
हैं
Sahir Ludhianvi
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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जिन
से
उठता
नहीं
कली
का
बोझ
उन
के
कंधों
पे
ज़िन्दगी
का
बोझ
वक़्त
जब
हाथ
में
नहीं
रहता
किस
लिए
हाथ
पर
घड़ी
का
बोझ
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Vikram Sharma
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वो
तो
ख़ुश-बू
है
हवाओं
में
बिखर
जाएगा
मसअला
फूल
का
है
फूल
किधर
जाएगा
Parveen Shakir
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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दुख
के
बाद
तो
ख़ुशियाँ
आनी
होती
है
मेरे
रब
तू
ये
भी
भूल
गया
शायद
Ravi 'VEER'
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आत्मा
के
इक
नहीं
सौ-सौ
ठिकाने
है
मगर
देह
का
निश्चित
है
जाना
एक
दिन
शमशान
में
Ravi 'VEER'
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वो
बे-वफ़ा
रहे
पर
मुझको
वफ़ा
रहेगी
आख़िर
वो
कब
तलक
ही
मुझ
सेे
जुदा
रहेगी
मुझको
यक़ीन
इक
दिन
वो
आ
मिलेगी
मुझ
सेे
तितली
भी
फूल
से
यूँँ
कब
तक
ख़फ़ा
रहेगी
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Ravi 'VEER'
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अगर
ख़ुशियाँ
मुकद्दर
में
रही
तो
ग़म
भी
आएँगे
अगर
आएँगे
हिस्से
ज़ख़्म
तो
मरहम
भी
आएँगे
Ravi 'VEER'
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फज़ूल
की
बाते
बना
लेती
है
वो
जिसे
अपनी
जुल्फे
तक
बनानी
नहीं
आती
Ravi 'VEER'
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