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Raunak Karn
rahi aañkhen hamaari nam hamesha hi
rahi aañkhen hamaari nam hamesha hi | रही आँखें हमारी नम हमेशा ही
- Raunak Karn
रही
आँखें
हमारी
नम
हमेशा
ही
हुआ
है
दर्द
हाँ
उसको
भुलाने
पर
- Raunak Karn
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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कभी
सहर
तो
कभी
शाम
ले
गया
मुझ
से
तुम्हारा
दर्द
कई
काम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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दिल
हिज्र
के
दर्द
से
बोझल
है
अब
आन
मिलो
तो
बेहतर
हो
इस
बात
से
हम
को
क्या
मतलब
ये
कैसे
हो
ये
क्यूँँकर
हो
Ibn E Insha
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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वो
सर
भी
काट
देता
तो
होता
न
कुछ
मलाल
अफ़्सोस
ये
है
उस
ने
मेरी
बात
काट
दी
Tahir Faraz
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जितने
हो
दूर
तुम
मेरे
उतने
क़रीब
हो
सच
तो
ये
है
कि
तुम
ही
मेरे
अब
नसीब
हो
जब
तुमने
चाहा
आ
गए
फिर
बात
मुझ
सेे
की
जब
चाहा
तुम
चले
गए
तुम
भी
अजीब
हो
तकलीफ़
तू
ख़ुदा
न
दे
इतनी
किसी
को
भी
लड़का
बड़ा
अकेला
हो
और
वो
ग़रीब
हो
ऐसी
मुझे
मिले
जो
कभी
ज़िंदगी
कि
फिर
लोगों
से
दूर
और
वो
ग़म
के
क़रीब
हो
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Raunak Karn
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किसे
कहते
निकालो
भीड़
से
बाहर
हमें
'रौनक'
सो
करना
क्या
था
ख़ुद
को
और
भी
गुमनाम
कर
डाला
Raunak Karn
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पहले
तो
उसने
प्यार
जताया
बहुत
मगर
फिर
क्या
हुआ
कि
छोड़
के
जाना
पड़ा
उसे
Raunak Karn
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किताबों
से
ही
मैं
वफ़ा
चाहता
हूँ
अकेले
कहीं
घूमना
चाहता
हूँ
मोहब्बत
नहीं
है
मुझे
यार
तुम
सेे
मैं
तो
बस
तुम्हें
देखना
चाहता
हूँ
ये
सीखा
कहाँ
तुमने
बातें
बनाना
मैं
तो
इक
हसीं
दिलरुबा
चाहता
हूँ
नहीं
चाहिए
प्यार
मुझको
किसी
से
मैं
तुम
सा
ही
इक
बे-वफ़ा
चाहता
हूँ
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Raunak Karn
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कभी
तुम
साथ
में
मेरे
रहे
तो
थे
वही
सब
सोच
कर
तुमको
भुलाना
है
यहाँ
जो
लोग
कब
से
रो
रहे
थे
वो
वही
बोले
हमें
अब
मुस्कुराना
है
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