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Raunak Karn
jitne ho door tum mere utne qareeb ho
jitne ho door tum mere utne qareeb ho | जितने हो दूर तुम मेरे उतने क़रीब हो
- Raunak Karn
जितने
हो
दूर
तुम
मेरे
उतने
क़रीब
हो
सच
तो
ये
है
कि
तुम
ही
मेरे
अब
नसीब
हो
जब
तुमने
चाहा
आ
गए
फिर
बात
मुझ
सेे
की
जब
चाहा
तुम
चले
गए
तुम
भी
अजीब
हो
तकलीफ़
तू
ख़ुदा
न
दे
इतनी
किसी
को
भी
लड़का
बड़ा
अकेला
हो
और
वो
ग़रीब
हो
ऐसी
मुझे
मिले
जो
कभी
ज़िंदगी
कि
फिर
लोगों
से
दूर
और
वो
ग़म
के
क़रीब
हो
- Raunak Karn
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गुज़रता
ही
नहीं
वो
एक
लम्हा
इधर
मैं
हूँ
कि
बीता
जा
रहा
हूँ
Madan Mohan Danish
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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आख़िर
में
यूँँ
हुआ
कि
मिरी
मात
हो
गई
मैं
उसके
साथ
थी
जो
ज़माने
के
साथ
था
Parul Singh "Noor"
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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है
बुरा
हाल
हर
दिवाने
का
और
फिर
डर
भी
है
ज़माने
का
है
हमें
इंतिज़ार
आने
का
फिर
तुझे
सीने
से
लगाने
का
झूट
तो
हम
कभी
नहीं
कहते
वक़्त
है
तुझको
सच
बताने
का
हौले
हौले
हमें
न
मारो
तुम
ज़हर
सीधा
हमें
पिलाने
का
क्यूँ
हमें
दे
रहे
हो
तुम
ताना
क्या
तरीक़ा
है
ये
रुलाने
का
जान
दे
सकते
हैं
तेरी
ख़ातिर
जान
हमको
न
आज़माने
का
झूट
था
प्यार
झूट
था
वा'दा
सब
दिल-ओ-जान
से
भुलाने
का
मत
करो
याद
उसको
इतना
भी
ख़तरा
रहता
है
जान
जाने
का
करना
है
जो
करो
वो
तुम
मन
से
बोलना
काम
है
ज़माने
का
आए
थे
प्यार
वो
बहुत
लेकर
मन
था
उनका
भी
छोड़
जाने
का
सोच
मत
ये
मैं
देर
से
आया
है
यही
वक़्त
मेरे
आने
का
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हमें
वो
नींद
में
भी
अब
बुलाती
है
सही
में
याद
भी
उसकी
सताती
है
गया
है
लग
पता
उसकी
सहेली
से
मुझे
अपना
सभी
को
वो
बताती
है
लिखे
थे
जो
ग़ज़ल
उसके
लिए
मैंने
सही
में
वो
ग़ज़ल
सबको
सुनाती
है
रुलाया
है
नहीं
हमको
किसी
ग़म
ने
हमें
जितना
सही
में
वो
रुलाती
है
नहीं
थी
तब
उसे
तकलीफ़
कोई
भी
ख़ुशी
तेरी
यही
बातें
बताती
है
कहाँ
जाए
किसे
बोले
तिरी
बातें
शबिस्ताँ
में
तुझे
क्या
याद
आती
है
उतरता
है
यहाँ
बादल
मगर
फिर
भी
बिना
बादल
नयन
ये
भीग
जाती
है
गया
था
पास
में
उसके
सही
में
कल
सही
में
वो
मुझे
अब
भूल
जाती
है
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भूल
जाओ
तुम
उसे
अब
न
चाहो
तुम
उसे
क्या
हुआ
था
प्यार
में
सच
बताओ
तुम
उसे
चैन
से
सोना
है
जो
फिर
भुलाओ
तुम
उसे।
तोड़ना
है
दिल
अगर
ये
सिखाओ
तुम
उसे
छोड़
देते
हैं
सभी
पर
मनाओ
तुम
उसे
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नहीं
हो
अब
यहाँ
पे
तुम,
भला
हम
अब
रिझाएँ
किसको
यक़ीनन
दर्द
तो
है
पर
भला
अब
हम
बताएँ
किसको
सुनाते
थे
ग़ज़ल
अपनी
हक़ीक़त
में
तुझे
मेरे
दिल
मगर
अब
तू
नहीं
तो
अब
ग़ज़ल
अपनी
सुनाएँ
किसको
मनाना
तो
नहीं
आता
हमें
ए
यार
सच
में
आख़िर
मगर
सीखा
मनाना
तो
भला
अब
हम
मनाएँ
किसको
रहा
है
याद
सब
कुछ
यार
हमको
तो
सही
में
लेकिन
हमें
बस
याद
हो
हर
वक़्त
तुम
अब
हम
भुलाएँ
किसको
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सनम
दिल
में
मिरे
थोड़ा
मगर
ये
दर्द
बाक़ी
है
चला
आ
बेड
पर
सोने
यहाँ
पे
फ़र्द
बाक़ी
है
रहा
है
दर्द
सर
में
हो,
बहुत
चश्मा
लगाया
है
लगाया
है
बहुत
मरहम
मगर
सर
दर्द
बाक़ी
है
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