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Raunak Karn
ghulaami ki agar jo baat aa jaa.e
ghulaami ki agar jo baat aa jaa.e | ग़ुलामी की अगर जो बात आ जाए
- Raunak Karn
ग़ुलामी
की
अगर
जो
बात
आ
जाए
क़सम
है
यार
मर
या
मार
जाएँगे
- Raunak Karn
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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यूँँ
तो
सर्कस
में
हम
बहुत
ख़ुश
हैं
फिर
भी
जंगल
तो
यार
जंगल
था
Harman Dinesh
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बस
एक
ही
दोस्त
है
दुनिया
में
अपना
मगर
उस
से
भी
झगड़ा
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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नहीं
मजनूँ
से
दिल
क़वी
लेकिन
यार
उस
ना-तवाँ
के
हम
भी
हैं
Meer Taqi Meer
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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कौन
रोता
है
अब
यहाँ
पे
यार
आँसू
छिपते
कहाँ
है
क्या
कहे
अब
उस
सेे
भला
हम
अब
वही
कुछ
सुनती
कहाँ
है
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Raunak Karn
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बगल
हट
कर
ज़रा
दिल
से
निकल
जा
रौनक
उसे
तू
बोलने
दे
बे-ख़लल
जा
रौनक
Raunak Karn
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किसी
दिल
में
किसी
घर
में
जगह
अपनी
बनाऊँगा
दिया
जो
कुछ
ज़माने
ने
उसे
फिर
मैं
लुटाऊंँगा
Raunak Karn
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हमारा
दर्द
भी
कुछ
यूँँ
उभरता
है
ग़ज़ल
बनके
क़लम
से
अब
उतरता
है
Raunak Karn
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अगर
अपना
लिखा
पढ़
लें
कभी
जो
ग़ौर
से
रौनक
हमें
अपनी
ग़ज़ल
भी
तब
भला
अपनी
नहीं
लगती
Raunak Karn
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