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Raunak Karn
ha
ha | हमें देते थे टॉफ़ी तुम सनम अब भूल बैठे हो
- Raunak Karn
हमें
देते
थे
टॉफ़ी
तुम
सनम
अब
भूल
बैठे
हो
कभी
तो
पूछ
लो
हम
सेे
कि
तुम
दिलदार
कैसे
हो
चले
जाओ
रहो
तुम
ख़ुश
करो
तुम
नाम
भी
अपना
कभी
भी
हम
न
बोलेंगे
कि
तुम
ऐ
यार
मेरे
हो
तुम्हें
हम
छोड़
देते
और
अपना
भी
नहीं
कहते
मगर
इस
बात
से
लगता
है
दिलबर
तुम
भी
सह
में
हो
- Raunak Karn
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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बोसा
लिया
जो
उस
लब-ए-शीरीं
का
मर
गए
दी
जान
हम
ने
चश्मा-ए-आब-ए-हयात
पर
Ameer Minai
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बहुत
पहले
से
उन
क़दमों
की
आहट
जान
लेते
हैं
तुझे
ऐ
ज़िंदगी
हम
दूर
से
पहचान
लेते
हैं
Firaq Gorakhpuri
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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मैंने
अपनी
ग़ज़लें
खारिज
कर
डाली
सोचो
मेरी
जान
तुम्हारा
क्या
होगा
Talib Toofani
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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मिरे
लब
पे
तिरी
फिर
बात
आई
है
तिरी
ख़ुशबू
लिए
ये
रात
आई
है
Raunak Karn
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नहीं
है
प्यार
अब
हमको
फ़लाने
से
न
पड़ता
फ़र्क
उसके
यार
जाने
से
हमारे
पास
तो
वो
ख़ुद
ही
आया
था
कहाँ
आया
हमारे
वो
बुलाने
से
बड़े
तो
हम
नहीं
फिर
भी
नज़र
में
हम
कहाँ
झुकते
किसी
के
भी
झुकाने
से
मिला
है
ग़म
हमें
अब
तो
बहुत
ज़्यादा
नहीं
हटता
यही
ग़म
अब
हटाने
से
रही
है
याद
वो
हमको
हमेशा
से
नहीं
भूले
हैं
उसको
हम
भुलाने
से
बड़ा
छोटा
कहाँ
कब
कौन
होता
है
ज़मीं
पे
या
गगन
में
बैठ
जाने
से
रहेगी
छाप
तो
उसकी
हमेशा
ही
नहीं
मिटता
यहाँ
पे
ग़म
मिटाने
से
तरस
आता
नहीं
अब
तो
उसे
'रौनक'
हमारी
जाँ
हमारा
दिल
दुखाने
से
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Raunak Karn
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अरे!
माँ
तो
हमेशा
बोलती
है
बात
सच
आख़िर
अरे!
बेटा
सभी
माँ
पे
यहाँ
तेवर
बदलता
है
Raunak Karn
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डर
न
होता
छोड़
देते
हाथ
से
दिल
तोड़
देते
ज़हर
देकर
जा
रहा
था
मौत
को
भी
मोड़
देते
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Raunak Karn
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न
जाने
पढ़ाया
यही
मीडिया
ने
इसी
देश
को
तो
लड़ा
हम
रहे
हैं
Raunak Karn
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