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Ranjan Kumar Barnwal
abhii jo dhoop men taptee zameen hai
abhii jo dhoop men taptee zameen hai | अभी जो धूप में तपती ज़मीं है
- Ranjan Kumar Barnwal
अभी
जो
धूप
में
तपती
ज़मीं
है
उसे
है
भीगनी
अगले
सहर
ही
- Ranjan Kumar Barnwal
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कतराते
हैं
बल
खाते
हैं
घबराते
हैं
क्यूँँ
लोग
सर्दी
है
तो
पानी
में
उतर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Mahboob Khizan
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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तेज़
धूप
में
आई
ऐसी
लहर
सर्दी
की
मोम
का
हर
इक
पुतला
बच
गया
पिघलने
से
Qateel Shifai
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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बाद-ए-बहार
में
सब
आतिश
जुनून
की
है
हर
साल
आवती
है
गर्मी
में
फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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शदीद
गर्मी
में
कैसे
निकले
वो
फूल-चेहरा
सो
अपने
रस्ते
में
धूप
दीवार
हो
रही
है
Shakeel Jamali
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वो
सर्दियों
की
धूप
की
तरह
ग़ुरूब
हो
गया
लिपट
रही
है
याद
जिस्म
से
लिहाफ़
की
तरह
Musavvir Sabzwari
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अब
की
सर्दी
में
कहाँ
है
वो
अलाव
सीना
अब
की
सर्दी
में
मुझे
ख़ुद
को
जलाना
होगा
Naeem Sarmad
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दिसंबर
की
सर्दी
है
उसके
ही
जैसी
ज़रा
सा
जो
छू
ले
बदन
काँपता
है
Amit Sharma Meet
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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लोग
मिल
के
बिछड़
रहे
साहिब
हाथ
फिर
से
पकड़
रहे
साहिब
जीत
कर
वो
हमें
जमाने
से
अब
हमीं
से
झगड़
रहे
साहिब
दौर
अब
तो
बदल
रहा
सच
में
गाँव
भी
अब
उजड़
रहे
साहिब
जिस्म
कब
तक
भला
खिलेगा
यूँँ
झूठ
में
वो
अकड़
रहे
साहिब
सच
सुनो
झूठ
बोलने
वाले
इश्क़
में
लोग
लड़
रहे
साहिब
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Ranjan Kumar Barnwal
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यहीं
पर
बग़ल
में
हो
लेकिन
बहुत
दूर
बैठे
हो
मुझ
सेे
Ranjan Kumar Barnwal
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अबद
हो
रही
है
हमारी
मुहब्बत
ये
जैसे
अज़ल
से
चली
आ
रही
है
Ranjan Kumar Barnwal
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पूछ
बैठा
मैं
ख़ुदी
से
क्या
मिला
है
ख़ुद-कुशी
से
दिल
अकेला
क्या
ही
करता
हार
बैठा
अजनबी
से
यार
तुम
पैसे
कमाओ
क्या
मिलेगा
आशिक़ी
से
तितलियों
के
इक
सबब
से
फूल
बन
बैठा
कली
से
दुश्मनी
कोई
भी
कर
ले
मैं
मरूँगा
बस
इसी
से
मौत
आनी
है
सभी
को
आज
तो
जी
ले
ख़ुशी
से
फूल
कलियाँ
तोड़
लाया
बाँटता
हूँ
क्यूँ
ख़ुशी
से
रीत
दुनिया
की
यही
है
फ़र्क
क्या
पड़ता
सही
से
ख़ुद
से
जो
मैं
कह
रहा
हूँ
आज
कह
दूँगा
सभी
से
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Ranjan Kumar Barnwal
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मुझे
क्यूँ
इश्क़
से
मतलब
रहेगा
मुझे
इस
इश्क़
ने
तन्हा
किया
है
Ranjan Kumar Barnwal
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