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Ranjan Kumar Barnwal
kah rahe hain log jo gaddaar mujhko
kah rahe hain log jo gaddaar mujhko | कह रहे हैं लोग जो ग़द्दार मुझको
- Ranjan Kumar Barnwal
कह
रहे
हैं
लोग
जो
ग़द्दार
मुझको
कल
बना
देंगे
वही
सरदार
मुझको
मुफ़लिसी
ने
कर
दिया
लाचार
मुझको
इसलिए
भाते
नहीं
त्यौहार
मुझको
कैसे
कह
दूँ
मैं
उसे
हमदर्द
अपना
छोड़
कर
जाता
है
वो
हरबार
मुझको
दूर
जब
से
वो
गया
है
ज़िंदगी
से
ज़िंदगी
की
अब
नहीं
दरकार
मुझको
काँपता
हूँ
इश्क़
के
भी
नाम
से
अब
इश्क़
में
ऐसी
मिली
है
हार
मुझको
- Ranjan Kumar Barnwal
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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दूसरी
कोई
लड़की
ज़िंदगी
में
आएगी
कितनी
देर
लगती
है
उस
को
भूल
जाने
में
Bashir Badr
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ज़िन्दगी
अब
के
मेरा
नाम
ना
शामिल
करना
गर
ये
तय
है
कि
यही
खेल
दोबारा
होगा
Wasi Shah
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कोई
झूठी
गुज़ारिश
क्यूँ
करेगा
अगर
करनी
हो
साज़िश
क्यूँ
करेगा
जिसे
बस
इश्क़
से
मतलब
रहा
है
वो
जिस्मों
की
नुमाइश
क्यूँ
करेगा
उसे
सब
चाँद
कहते
हैं
ज़मीं
पर
कोई
पाने
की
कोशिश
क्यूँ
करेगा
वो
मुझको
जानकर
भी
भूल
बैठा
वो
अब
मेरी
सिफ़ारिश
क्यूँ
करेगा
मुहब्बत
जान
लेगी
जानकर
भी
भला
रंजन
ये
ख़्वाहिश
क्यूँ
करेगा
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Ranjan Kumar Barnwal
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अजब
इतिहास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
नदी
की
प्यास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
गिरेगी
ओस
की
बूँदें
यक़ीं
कर
मरुस्थल
घास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
बदन
से
रूह
तक
चर्चा
रहेगा
वो
इक
एहसास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
जिसे
मैं
जीतकर
भी
हार
बैठा
उसी
को
ख़ास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
भटकता
फिर
रहा
खाने
कमाने
ये
क्या
वनवास
लिखकर
बैठा
हूँ
मैं
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Ranjan Kumar Barnwal
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अभी
जो
धूप
में
तपती
ज़मीं
है
उसे
है
भीगनी
अगले
सहर
ही
Ranjan Kumar Barnwal
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मैं
इसलिए
भी
कुछ
नहीं
कहता
उसे
ये
ज़िंदगी
रहती
नहीं
तो
इश्क़
क्या
Ranjan Kumar Barnwal
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हमें
है
ख़बर
वो
किधर
जा
रहे
हैं
भरोसा
है
लेकिन
कि
घर
जा
रहे
हैं
हमें
था
ये
लगता
वो
हैं
ख़ानदानी
वही
बस
वही
हैं
जिधर
जा
रहे
हैं।
जलाया
था
हमने
मुहब्बत
में
उनको
सनम
हद
से
आगे
गुज़र
जा
रहे
हैं
बहुत
दिन
हुए
हैं
जो
पानी
दिए
थे
वो
फूलों
को
देखो
वो
मर
जा
रहे
हैं
हक़ीक़त
सुनाऊँ
या
क़िस्सा
पुराना
वो
वा'दा
भी
कर
के
मुकर
जा
रहे
हैं
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Ranjan Kumar Barnwal
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