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sahil
raanjha bane kabhi to kabhi qais ban ga.e
raanjha bane kabhi to kabhi qais ban ga.e | राँझा बने कभी तो कभी क़ैस बन गए
- sahil
राँझा
बने
कभी
तो
कभी
क़ैस
बन
गए
सदियों
से
एक
हिज्र
मनाते
रहे
हैं
हम
- sahil
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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वफ़ा
की
गर
सज़ा
है
ये
सज़ा
पूरी
तो
दे
कर
जा
अभी
तो
दिल
ही
टूटा
है
अभी
धड़कन
तो
जारी
है
sahil
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बराबर
तंज
कसती
थीं
हवाएँ
दिया
जलता
रहा
बस
मुस्कुरा
कर
sahil
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तिश्नालबी
लिए
ही
मरा
बज़्म-ए-रिंद
में
साक़ी
की
जिसपे
नज़र-ए-इनायत
नहीं
रही
sahil
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शजर
सब
कट
चुके
हैं
अब
वफ़ा
के
थे
बचे
जितने
जफ़ा
की
धूप
में
जलना
ही
अब
अपना
मुक़द्दर
है
sahil
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झील
आँखें
ज़ुल्फ़
बादल
चाल
जैसे
मोरनी
सारी
क़ुदरत
की
करामत
इक
बदन
में
क़ैद
है
sahil
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