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Raj
sab chhato pe usii ke makaan ki taraf dekhne aate the
sab chhato pe usii ke makaan ki taraf dekhne aate the | सब छतों पे उसी के मकाँ की तरफ़ देखने आते थे
- Raj
सब
छतों
पे
उसी
के
मकाँ
की
तरफ़
देखने
आते
थे
शहर
क्या
छोड़ा
उस
शख़्स
ने
सबको
क़िबला
बदलना
पड़ा
- Raj
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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बे
तेरे
क्या
वहशत
हम
को
तुझ
बिन
कैसा
सब्र-ओ-सुकूँ
तू
ही
अपना
शहर
है
जानी
तू
ही
अपना
सहरा
है
Ibn E Insha
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दिल
की
बस्ती
पुरानी
दिल्ली
है
जो
भी
गुज़रा
है
उसने
लूटा
है
Bashir Badr
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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एक
दरवेश
को
तिरी
ख़ातिर
सारी
बस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
Ammar Iqbal
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हमने
पर्चे
आँसुओं
से
भर
दिए
और
तुमने
इतने
कम
नंबर
दिए
ऊंचे
नीचे
घर
थे
बस्ती
में
बहुत
जलजले
ने
सब
बराबर
कर
दिए
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Zubair Ali Tabish
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बता
दी
दिल
की
सभी
बातें
उसको
मैने
आज
मैं
मरघटे
से
हूँ
लौटा
अज़ान
देते
हुए
Raj
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बदलना
गर
बुराई
का
सबब
है
तो
अपने
चेहरे
में
कालिख़
लगा
लो
Raj
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ग़म
की
चिंगारियों
को
हवा
दीजिए
दीजिए
दीजिए
बद्दुआ
दीजिए
Raj
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बात
है
धोके
की
ईजाद
से
पहले
बात
है
ताले
की
ईजाद
से
पहले
इक
आवाज़
में
दौड़े
आते
थे
लोग
बात
है
जूते
की
ईजाद
से
पहले
मंदिर
मस्जिद
गिरजाघर
होते
थे
हर
इक
टीके
की
ईजाद
से
पहले
दूर
रखे
होंगे
झीलों
से
पत्थर
तब
आईने
की
ईजाद
से
पहले
लोग
तजरबे
से
आगे
तक
आए
पढ़ने
लिखने
की
ईजाद
से
पहले
तेज़
हवा
का
डेरा
होगा
जग
में
उसके
झुमके
की
ईजाद
से
पहले
मेरी
ख़ामी
पे
चादर
चढ़ती
थी
तेरे
क़िस्से
की
ईजाद
से
पहले
प्यार
रहा
होगा
लोगों
में
कितना
सिक्के
पैसे
की
ईजाद
से
पहले
अश्क
छिपाना
भी
फ़न
होता
होगा
काले
चश्में
की
ईजाद
से
पहले
लोग
लगाते
होंगे
अंदाज़े
राज
तब
दरवाज़े
की
ईजाद
से
पहले
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Raj
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नाम
का
मेरे
अलम
फ़हराने
को
बोला
गया
था
देखते
ही
देखते
सबके
दिलों
में
आ
गया
मैं
Raj
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